Do pratikraman vidhi (gujarati & hindi)
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श्री दो प्रतिक्रमण सूत्र विधि
जैन धर्म की दैनिक साधना और आत्म-शुद्धि के सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान को समर्पित एक परम आवश्यक ग्रंथ! "श्री दो प्रतिक्रमण सूत्र" श्रावक और श्राविकाओं के लिए दिनभर में जाने-अनजाने में हुए पापों, भूलों और कर्मों की आलोचना कर आत्मा को निर्मल बनाने का एक दिव्य माध्यम है।
यह विशेष संस्करण न केवल मूल सूत्रों को समाहित करता है, बल्कि उनके गहरे अर्थों को समझने के लिए हिंदी भावार्थ और उपयोगी विवरणों के साथ तैयार किया गया है, ताकि हर आराधक सहजता से क्रिया के भावों से जुड़ सके।
पुस्तक की मुख्य विशेषताएँ (Key Features & Highlights):
• दो प्रतिक्रमण सूत्रों विधि का संकलन: दैनिक जीवन में आवश्यक दो मुख्य प्रतिक्रमण सूत्रों का प्रामाणिक और शुद्ध पाठ।
• हिंदी भावार्थ सहित: सूत्रों का केवल रटन नहीं, बल्कि उनका वास्तविक अर्थ समझने के लिए सरल हिंदी अनुवाद (भावार्थ) दिया गया है, जो एकाग्रता बढ़ाने में मदद करता है।
• उपयोगी विवरण और विधि: प्रतिक्रमण की सही विधि, आसन, मुद्राएँ और अनुष्ठान से जुड़े महत्वपूर्ण नियमों का विस्तार से मार्गदर्शन।
• परम्परागत मुखपृष्ठ (Cover Design): जैसा कि आप फोटो में देख सकते हैं, पुस्तक के आवरण पर सादगी और वैराग्य से परिपूर्ण एक जैन मुनि भगवंत की सुंदर कलाकृति अंकित है, जो आराधना की गहराई को दर्शाती है।
• प्रामाणिक प्रकाशन: यह ग्रंथ श्री जैन दर्शन प्रकाशन मंदिर, अहमदाबाद द्वारा प्रकाशित है, जो अपनी प्रामाणिकता और शुद्धता के लिए जाना जाता है।
यह ग्रंथ किसके लिए अनिवार्य है?
• दैनिक आराधक: जो प्रतिदिन सुबह (राई) और शाम (देवसी) प्रतिक्रमण की क्रिया करते हैं।
• पर्युषण पर्व आराधना: पर्यूषण महापर्व के दिनों में वार्षिक (सांवत्सरिक) प्रतिक्रमण और आत्म-निरीक्षण के लिए।
• ज्ञानशाला और युवा वर्ग: जो युवा या बच्चे सूत्रों का अर्थ समझकर जैन क्रियाओं को वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से सीखना चाहते हैं।
• धार्मिक प्रभावना (Gift): तपस्वियों के पारणे, साधर्मिक भक्ति, या चातुर्मास के दौरान ज्ञानदान और प्रभावना स्वरूप भेंट करने के लिए एक सर्वोत्तम और ज्ञानवर्धक उपहार।
Product features
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Materials and care
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Merchandising tips
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