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navpad aaradhna vidhi book (gujarati)

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नवपद आराधन विधि (आयंबील ओलीनी विधि) - श्री सिद्धचक्र महापूजन एवं तपस्या ग्रंथ

जैन शासन की सबसे महिमामयी, शाश्वत और अलौकिक आराधना को समर्पित एक अत्यंत अमूल्य ग्रंथ! "नवपद आराधन विधि (आयंबील ओलीनी विधि)" श्रावक और श्राविकाओं के लिए वर्ष में दो बार आने वाली पावन श्री शाश्वत ओली जी की नवपद आराधना को पूर्ण शास्त्रोक्त विधि, नियमों और शुद्ध भावों के साथ संपन्न करने का एक संपूर्ण माध्यम है।

इस पवित्र ग्रंथ में नवपद (अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु, दर्शन, ज्ञान, चारित्र और तप) की महिमा, उनके गुण, मंत्र-जाप और आयंबील तप की संपूर्ण विधि का अनूठा संकलन किया गया है।

पुस्तक की मुख्य विशेषताएँ और विषय (Key Features & Contents):

• संपूर्ण नवपद आराधना मार्गदर्शन: श्री सिद्धचक्र महायंत्र के नौ पदों की विस्तृत महिमा, प्रत्येक पद के गुण, उनके प्रतीक रंग और ध्यान धरने की प्रामाणिक विधि।

• आयंबील ओलीनी विधि: ओली जी के ९ दिनों के दौरान किए जाने वाले आयंबील तप के नियम, प्रत्याख्यान (पचक्खाण), देववंदन और आवश्यक ढाल-चैत्यवंदन का संग्रह।

• भव्य एवं सिद्धचक्र यंत्र मुखपृष्ठ (Cover Design): जैसा कि आप फोटो में देख सकते हैं, पुस्तक का आवरण (कवर) अत्यंत सुंदर और उज्वलित सुनहरे-पीले रंग (Spiritual Golden-Yellow) के पृष्ठभूमि से सुसज्जित है। केंद्र में श्री सिद्धचक्र महायंत्र के नौ पदों को चित्रों और प्रतीकों के माध्यम से एक बेहद सुंदर रंग-बिरंगे कमल चक्र के रूप में दर्शाया गया है, जिसके मध्य में प्रभु विराजमान हैं।

• प्रामाणिक प्रकाशन: यह पावन ग्रंथ जैन दर्शन प्रकाशन मंदिर, अहमदाबाद (Shri Jain Darshan) द्वारा प्रकाशित है, जो जैन धार्मिक साहित्यों की शुद्धता, सटीकता और उच्च कोटि के संपादन के लिए संपूर्ण जैन समाज में विश्वसनीय माना जाता है।

• स्पष्ट और सुपाठ्य अक्षर: तपस्या और आराधना के दिनों में उपाश्रय या घर के मंदिर में बिना किसी कठिनाई के शुद्ध वाचन व जाप करने के लिए पुस्तक के भीतर के फॉन्ट (अक्षरों) को एकदम साफ और बड़ा रखा गया है।

यह पुस्तक किसके लिए अनिवार्य है?

• ओली जी के आराधक: जो श्रावक-श्राविकाएं चैत्र और अश्विन मास की शाश्वत ओली जी में नवपद जी की आराधना और आयंबील का तप करते हैं।

• नित्य नवपद ध्यान: जो प्रतिदिन नवपद जी के गुणों का स्मरण, जाप (माळ गणवी) और खमासमण देने की क्रिया करते हैं।

• धार्मिक प्रभावना (Gifting): श्री सिद्धचक्र महापूजन, ओली तप के पारणे, उपधान तप, या किसी भी जैन धार्मिक महोत्सव के शुभ अवसर पर साधर्मिक भाई-बहनों को प्रभावना (ज्ञानदान उपहार) स्वरूप भेंट करने के लिए सबसे पवित्र और उत्तम विकल्प।

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