Snatra pooja book with vidhi sahit
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श्री स्नात्र पूजा (विधि सहित) - प्रभुजी नो जन्माभिषेक ग्रंथ
जैन धर्म के अत्यंत पावन और दैनिक अनुष्ठान को समर्पित एक अमूल्य पुस्तक! "श्री स्नात्र पूजा (विधि सहित)" श्रावक-श्राविकाओं के लिए प्रभु भक्ति और क्रिया-अनुष्ठान को सही विधि से संपन्न करने का एक संपूर्ण माध्यम है।
इस पवित्र ग्रंथ में देव-गुरु-धर्म की आराधना, प्रभु के जन्माभिषेक की मंगलकारी विधि और भक्तिमय भजनों/स्तुतियों का ऐसा सुंदर संकलन है, जो आपके घर-आँगन और मंदिर को सकारात्मक ऊर्जा से भर देगा।
पुस्तक की मुख्य विशेषताएँ और विषय-सूची (Key Features & Contents):
• संपूर्ण स्नात्र पूजा विधि: जैन शास्त्रों के अनुसार स्नात्र पूजा की शुरुआत से लेकर अंत तक की पूरी विधि को बेहद सरल और क्रमबद्ध तरीके से समझाया गया है।
• प्रभुजी नो जन्माभिषेक (Prabhuji No Janmabhishek): सुमेरु पर्वत पर ५६ दिक्कुमारियों और इंद्र महाराजा द्वारा किए जाने वाले प्रभु के पावन जन्माभिषेक के प्रसंगों और ढालों का सुंदर वर्णन।
• शुद्ध एवं स्पष्ट पाठ: मंत्रों, श्लोकों और ढालों का शुद्ध वाचन करने के लिए एकदम साफ और बड़े फॉन्ट का उपयोग किया गया है।
• आकर्षक मुखपृष्ठ (Cover Design): जैसा कि आप फोटो में देख सकते हैं, पुस्तक के मुख्य आवरण पर ५६ दिक्कुमारियों/इंद्र द्वारा बाल तीर्थंकर परमात्मा के जन्माभिषेक का एक अत्यंत मनमोहक और भक्तिपूर्ण चित्र अंकित है।
• मजबूत बाइंडिंग और प्रीमियम क्वालिटी: नित्य स्वाध्याय और पूजा-पाठ के समय उपयोग के लिए मजबूत हार्डबाउंड कवर और बेहतरीन क्वालिटी के पन्ने।
यह पुस्तक कहाँ-कहाँ उपयोगी है?
• दैनिक देव-पूजा: घर के जिनालय या जैन मंदिर में नियमित रूप से स्नात्र पूजा पढ़ाने और करने के लिए।
• मांगलिक प्रसंग: नए घर के उद्घाटन (गृह प्रवेश), जन्मदिवस, व्यापार की शुरुआत या किसी भी शुभ प्रसंग पर स्नात्र महोत्सव रखने के लिए।
• धार्मिक प्रभावना (Gift): भक्ति संगीत, तपस्या के पारणे, संघ पूजा या पर्यूषण महापर्व के दौरान साधर्मिक भक्ति और प्रभावना स्वरूप भेंट देने के लिए सर्वोत्तम।
Product features
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Materials and care
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Merchandising tips
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